Sunday, December 26, 2010

Mera Maalik Mera Khuda

फकत बाहर निकलने की,
किसे औकात होती है|
तू सबको खूब देता है,
जो तुझमें बात होती है|

न खुद से कुछ रखी हसरत ,
न अब दुनिया से आशा है|
मेरे हक़ में गवाही दे,
ये सब तेरा तमाशा है|

तमन्ना जन्मों की पाली,
रहम का भी तकाजा है|
तेरी दुनिया ने जाके अब,
मुझे पागल नवाजा है|

कहाँ अब दोस्ती पाती,
तेरी दुनिया में जामा है|
नहीं अब कृष्ण होते हैं,
नहीं मिलते सुदामा हैं|

मैं तेरी हसरतों में खुद को,
अब नीलाम करता हूँ|
मैं अब हूँ आरज़ू तेरी,
मैं तेरा काम करता हूँ|